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महिलाओं की आत्मनिर्भरता और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संगम बना “व्यंजनों की बगिया”

महिलाओं की आत्मनिर्भरता और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संगम बना “व्यंजनों की बगिया”

माँई G फाउंडेशन के आयोजन में लोकस्वाद, लोकखेल और लोकनृत्य ने बांधा समां

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कोरबा। महिलाओं को सशक्त एवं स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर सक्रिय माँई G फाउंडेशन सोसायटी द्वारा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष आयोजन “व्यंजनों की बगिया” का भव्य आयोजन किया गया। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी यह कार्यक्रम 18 जनवरी 2026, रविवार को घंटाघर स्थित ओपन थिएटर में प्रातः 10 बजे से प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस गरिमामय आयोजन में उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन जी, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री गोपाल मोदी जी, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत जी, जिला महामंत्री श्री नरेन्द्र देवांगन जी, हरिभूमि के जिला ब्यूरो प्रमुख श्री राकेश श्रीवास्तव जी, नव भारत के जिला ब्यूरो प्रमुख श्री नौशाद खान जी, माँई G फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती निधि तिवारी जी, सचिव श्रीमती हेमलता शर्मा जी एवं सचिव श्रीमती श्रद्धा बुंदेला जी की गरिमामय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों के विविध आकर्षक स्टॉल लगाए गए, जिनमें चीला, फरा, अइरसा, पीडिया, पपची, देहरौरी, बड़ी, बिजौरी, दही-मिर्ची सहित अनेक पारंपरिक स्वादों ने लोगों को छत्तीसगढ़ी खानपान से रूबरू कराया। यह व्यंजन मेला न केवल स्वाद का उत्सव बना, बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।
सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित पारंपरिक एवं मनोरंजक प्रतियोगिताओं ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। फुगड़ी, खो-खो, कुर्सी दौड़, पतंग उड़ाओ प्रतियोगिता, साथ ही छत्तीसगढ़ी वेशभूषा प्रतियोगिता एवं छत्तीसगढ़ी व्यंजन थाली सजाओ प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। प्रतिभागियों में महिलाओं व युवतियों का उत्साह देखते ही बनता था।
शाम 4 बजे से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को समर्पित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। प्रसिद्ध लोक कलाकार पूजा दीवान द्वारा प्रस्तुत पंडवानी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने सुआ, गेड़ी, करमा, ददरिया, छेरछेरा जैसे छत्तीसगढ़ी लोकगीत एवं नृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियाँ देकर पूरे वातावरण को लोकमय बना दिया।
“व्यंजनों की बगिया” आयोजन ने यह संदेश दिया कि महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ी संस्कृति का उत्सव बना, बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका को और अधिक सशक्त करने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम साबित हुआ।

 

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Rajesh Sharma

इको इंडिया टुडे न्यूज़ से जुड़े एक अनुभवी पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में वर्षों से व्यापक अनुभव प्राप्त है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने आर्थिक, औद्योगिक, सामाजिक और विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावशाली रिपोर्टिंग की है।

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