महुआ बना “पीला सोना”, ग्रामीणों की बढ़ी आमदनी का सहारा

महुआ बना “पीला सोना”, ग्रामीणों की बढ़ी आमदनी का सहारा
(Ecoindiatoday)कोरबा जिले के करतला क्षेत्र में महुआ अब ग्रामीणों के लिए “पीला सोना” साबित हो रहा है। गर्मियों के मौसम में महुआ के पेड़ों से गिरने वाले फूलों को सुबह-सुबह महिलाएं, पुरुष और बच्चे मिलकर बीनते हैं। ताजे और अच्छी गुणवत्ता वाले इन फूलों की बाजार में अच्छी कीमत मिलने से ग्रामीणों की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
महुआ केवल आय का साधन ही नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। इससे तेल, लड्डू और पारंपरिक पेय पदार्थ बनाए जाते हैं, जो घरेलू उपयोग में आते हैं। इससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी होती हैं और अतिरिक्त खर्च कम होता है।
कई गांवों में स्वयं सहायता समूहों ने महुआ संग्रह और विपणन को संगठित रूप दिया है, जिससे बेहतर दाम मिल रहा है और मुनाफा भी बढ़ा है। यह पहल ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित हो रही है।
इस तरह महुआ बीनना अब एक सरल, सुलभ और लाभकारी रोजगार बन गया है, जो ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रहा है।
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